Monday, May 20, 2024

लू तापघात से कैसे बचें

इन दिनों भयंकर गर्मी Heat Wave पड़ रही है । तापमान Temperature में लगातार जारी उछाल व तेज गर्मी के मद्देनजर आमजन से बचाव रखने की अपील है। विशेषकर बच्चों, बूढ़ों, गर्भवतियों तथा बीमार व्यक्तियों द्वारा एहतियात बरतना चाहिए । 


इस बारे में मरू प्रदेश राजस्थान Rajasthan के गंगानगर Gnagangar  ज़िले के सीएमएचओ CMHO डॉ. अजय सिंगल  कहते है कि जहां तक संभव हो धूप में न निकलें, निकलें तो शरीर पूर्ण तरह से ढका हो। सफेद या हल्के रंग के ढीले व सूती कपड़ों का उपयोग करें। लू तापघात से प्रायः कुपोषित बच्चे, बीमार, वृद्व, गर्भवती महिलाऐं और श्रमिक आदि शीध्र प्रभावित हो सकते हैं। इन्हे प्रात: 10 बजे से सांय 6 बजें तक तेज गर्मी से बचाने के लिए छायादार ठंडे स्थान पर रहने का प्रयास करें। लू के लक्षण प्रतीत होने पर तुरंत प्राथमिक उपचार करते हुए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।

लू-तापघात से बचाव के लिये ये सावधानियां बरतें : Precautions 

*  बहुत अधिक भीड़, गर्म घुटन भरे कमरों से बचें, रेल बस आदि की यात्रा अत्यावश्यक होने पर ही करें।

* बिना भोजन किये बाहर न निकलें। भोजन Food करके एवं पानी पी कर ही बाहर निकलें। 

* सड़े-गले फल व बासी सब्जियों का उपयोग हरगिज ना करें।

*  गर्दन के पिछले भाग कान एवं सिर को गमछे या तौलिये से ढक कर ही धूप में निकलें। रंगीन चश्में एवं छतरी का प्रयोग करें।

* गर्मी मे हमेशा पानी Water एवं पेय पदार्थो जैसे नींबू पानी, नारियल पानी, ज्यूस आदि का प्रयोग करते रहें।

*  अकाल राहत कार्यों पर अथवा श्रमिकों के कार्यस्थल पर छाया एवं पानी का पूर्ण प्रबन्ध रखा जावे, ताकि श्रमिक थोडी-थोडी देर में छायादार स्थानों पर विश्राम कर सकें।

* कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक से बचें।

लू तापघात के लक्षण Symptoms 

सीएमएचओ डॉ. सिंगला ने बताया कि शरीर में लवण व पानी अपर्याप्त होने पर विषम गर्म वातावरण में लू व तापघात निम्नांकित लक्षणों के द्वारा प्रभावी होता है-

* सिर का भारीपन व सिरदर्द।

* अधिक प्यास लगाना व शरीर में भारीपन के साथ थकावट।

* जी मिचलाना, सिर चकराना व शरीर का तापमान बढ़ना (105 एफ या अधिक)।

* पसीना आना बंद होना, मुंह का लाल हो जाना व त्वचा का सूखा होना।

* अत्यधिक प्यास का लगना, बेहोशी जैसी स्थिति का होना।


क्या है लू तापघात ? What is Heat Stroke 

सीओआईईसी विनोद बिश्नोई ने बताया कि चिकित्सकीय दृष्टि से लू तापघात के लक्षण लवण व पानी की आवश्यकता व अनुपात विकृति के कारण होती है। मस्तिष्क का एक केंद्र जो मानव के तापमान को सामान्य बनाए रखता है, काम करना छोड़ देता है। लाल रक्त कोशिकाएं रक्त वाहिनियों में टूट जाती हैं व कोशिकाओं में जो पोटेशियम लवण होता है वह रक्त संचार में आ जाता है जिससे ह्रदय गति, शरीर के अन्य अंग व अवयव प्रभावित होकर लू तापघात के रोगी को मौत के मुंह में धकेल देते हैं।

लू-तापघात से प्रभावित व्यक्ति का तत्काल ऐसे करें प्राथमिक उपचार First Aid

सीएमएचओ डॉ. सिंगला ने बताया कि लू तापघात से प्रभावित रोगी को तुरंत छायादार जगह पर कपड़े ढीले कर लेटा दिया जावे एवं हवा करें। व्यक्ति को तुरंत ठंडा पानी, ओआरएस, नींबू पानी, नारियल पानी, कच्चे आम का पना जैसे पेय पदार्थ पिलाएं। पानी व बर्फ से शरीर को ठंडा करने का प्रयास करें फिर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लेकर जाएं।

थैलेसीमिया रोग: लक्षण और उपचार

थैलेसीमिया Thalassemia एक गंभीर बीमारी है। इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है. इसी जागरूकता से इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है।

क्या है ये बीमारी:

डॉ मनोहर लाल सहायक सिविल सर्जन बरनाला का कहना है कि थैलेसीमिया एक जन्मजात बीमारी है इसके बढ़ने का मुख्य कारण लोगों में जागरूकता की कमी है। इस बीमारी से बचाव के लिए विवाह योग्य लड़के-लड़कियों को शादी से पहले अपना एचबीए-2 HBA 2 Test टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया रक्त की एक गंभीर अनुवांशिक Hereditary Disease बीमारी है। जिसमें पीड़ित व्यक्ति में लाल रक्त Red Blood Cell कोशिकाएं बनाने की शक्ति कम या ख़त्म हो जाती है।

थैलेसीमिया के लक्षण

 सिविल अस्पताल बरनाला की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ ज्योति कौशल का कहना है कि इस बीमारी के मुख्य लक्षण प्रभावित व्यक्ति की वृद्धि और विकास में देरी, अधिक कमजोरी और थकान महसूस होना, चेहरे की संरचना में बदलाव, त्वचा का पीला होना, मोटा होना है। मूत्र गाढ़ा आता है और यकृत का बढ़ना आदि इसके लक्षण है 

इलाज

बरनाला जिले की जिला स्कूल स्वास्थ्य समन्वयक सुखपाल कौर का कहना है कि थैलेसीमिया रोग के उपचार में थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्ति को हर 10-15 दिनों में रक्त चढ़ाने  की आवश्यकता होती है। इसका इलाज सभी जिला अस्पतालों में मुफ्त किया जाता है और इसके टेस्ट सरकारी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों लुधियाना, होशियारपुर, गुरदासपुर, जालंधर व एमज बठिंडा मुफ्त किया जाता है।

 जाँच  

 कुलदीप सिंह मान जिला मास मीडिया अधिकारी और हरजीत सिंह  जिला बी.सी.सी. समन्वयक बरनाला का कहना है कि इन बच्चों की सुविधा के लिए हमें रक्तदान करना चाहिए और लोगों को भी जागरूक करना चाहिए कि तीन महीने तक आयरन फोलिक एसिड की गोलियां या पीने की  दवा लेने के बाद यदि बच्चे का रक्त स्तर 7 से 9 ग्राम से न बढे तो उसका एचपीएलसी टेस्ट और  प्रत्येक गर्भवती महिला को पहले तीन महीनों के दौरान एचपीएलसी टेस्ट  भी करानी चाहिए।