Monday, May 20, 2024

थैलेसीमिया रोग: लक्षण और उपचार

थैलेसीमिया Thalassemia एक गंभीर बीमारी है। इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है. इसी जागरूकता से इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है।

क्या है ये बीमारी:

डॉ मनोहर लाल सहायक सिविल सर्जन बरनाला का कहना है कि थैलेसीमिया एक जन्मजात बीमारी है इसके बढ़ने का मुख्य कारण लोगों में जागरूकता की कमी है। इस बीमारी से बचाव के लिए विवाह योग्य लड़के-लड़कियों को शादी से पहले अपना एचबीए-2 HBA 2 Test टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया रक्त की एक गंभीर अनुवांशिक Hereditary Disease बीमारी है। जिसमें पीड़ित व्यक्ति में लाल रक्त Red Blood Cell कोशिकाएं बनाने की शक्ति कम या ख़त्म हो जाती है।

थैलेसीमिया के लक्षण

 सिविल अस्पताल बरनाला की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ ज्योति कौशल का कहना है कि इस बीमारी के मुख्य लक्षण प्रभावित व्यक्ति की वृद्धि और विकास में देरी, अधिक कमजोरी और थकान महसूस होना, चेहरे की संरचना में बदलाव, त्वचा का पीला होना, मोटा होना है। मूत्र गाढ़ा आता है और यकृत का बढ़ना आदि इसके लक्षण है 

इलाज

बरनाला जिले की जिला स्कूल स्वास्थ्य समन्वयक सुखपाल कौर का कहना है कि थैलेसीमिया रोग के उपचार में थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्ति को हर 10-15 दिनों में रक्त चढ़ाने  की आवश्यकता होती है। इसका इलाज सभी जिला अस्पतालों में मुफ्त किया जाता है और इसके टेस्ट सरकारी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों लुधियाना, होशियारपुर, गुरदासपुर, जालंधर व एमज बठिंडा मुफ्त किया जाता है।

 जाँच  

 कुलदीप सिंह मान जिला मास मीडिया अधिकारी और हरजीत सिंह  जिला बी.सी.सी. समन्वयक बरनाला का कहना है कि इन बच्चों की सुविधा के लिए हमें रक्तदान करना चाहिए और लोगों को भी जागरूक करना चाहिए कि तीन महीने तक आयरन फोलिक एसिड की गोलियां या पीने की  दवा लेने के बाद यदि बच्चे का रक्त स्तर 7 से 9 ग्राम से न बढे तो उसका एचपीएलसी टेस्ट और  प्रत्येक गर्भवती महिला को पहले तीन महीनों के दौरान एचपीएलसी टेस्ट  भी करानी चाहिए।

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