Tuesday, December 16, 2025

रेबीज़ (हलक़ाव) : एक घातक लेकिन पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी

समय पर टीकाकरण से बचाव संभव

रेबीज़ Rabies, जिसे आम भाषा में हलक़ा कहा जाता है, एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी  Viral Disease है। यह रोग मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों infected animals के काटने, खरोंचने या चाटने से मनुष्यों में फैलता है। यदि समय पर सही उपचार और टीकाकरण vaccination न किया जाए तो यह बीमारी मृत्यु का कारण भी बन सकती है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि समय पर एंटी-रेबीज़ टीकाकरण anti-rabies vaccination से इस बीमारी से पूरी तरह बचाव संभव है।

रेबीज़ क्या है और कैसे फैलता है?

डॉ. कविता सिंह
सिविल सर्जन फाज़िल्का डॉ. कविता सिंह के अनुसार, रेबीज़ Rabies कई प्रकार के वायरस Virus के कारण होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो मानव के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। यह बीमारी आमतौर पर कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, नेवला, बंदर, सियार तथा अन्य जानवरों के काटने से फैलती है।


क्या रेबीज़ का इलाज संभव है?

डॉ. कविता सिंह बताती हैं कि रेबीज़ भले ही घातक बीमारी हो, और एक बार यह बीमारी हो जाये तो
मृत्यु लाजमी है  लेकिन अगर समय पर टीकाकरण करवा लिया जाये तो इसका खतरा पूरी तरह से टल सकता इसलिए  समय पर एंटी-रेबीज़ वैक्सीन anti-rabies vaccination  का पूरा कोर्स लिया जाए। फाजिल्का जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं—जिला अस्पताल, सब-डिवीजनल अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और आम आदमी क्लीनिकों—में रेबीज़ का टीकाकरण नियमित रूप से किया जा रहा है।

भारत में रेबीज़ से होने वाली मौतें

डॉ. रिंकू चावला 
जिला टीकाकरण अधिकारी फाजिल्का  डॉ. रिंकू चावला के अनुसार, भारत में हर वर्ष हजारों लोगों की मौत रेबीज़ के कारण होती है। यदि लोग इस बीमारी के प्रति जागरूक हो जाएं और समय पर इलाज करवाएं, तो इन मौतों को रोका जा सकता है। उन्होंने पालतू जानवरों का हर साल टीकाकरण करवाने पर विशेष जोर दिया।

एंटी-रेबीज़ टीकाकरण की सही विधि

जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. सुनीता कंबोज के अनुसार,

जानवर के काटने के बाद एंटी-रेबीज़ वैक्सीन की 0.1 मि.ली. की खुराक

पहले दिन

तीसरे दिन

सातवें दिन

28वें दिन

दोनों कंधों पर लगाई जाती है।

यदि घाव गहरा हो या सिर के पास हो, तो इसे तीसरी श्रेणी (Category-III) माना जाता है और व्यक्ति के वजन के अनुसार रेबीज़ सीरम (RIG) भी दिया जाता है। साथ ही पहले दिन टेटनस का इंजेक्शन भी लगाया जाता है।

घाव की तुरंत देखभाल बहुत ज़रूरी

जानवर के काटने, खरोंचने या चाटने पर:

घाव को बहते पानी में कम से कम 15 मिनट तक साबुन से धोएं (विशेषकर कपड़े धोने वाला साधारण साबुन)।

इससे संक्रमण की संभावना काफी कम हो जाती है।

घाव पर मिर्च, सुरमा, सरसों का तेल या घरेलू नुस्खे बिल्कुल न लगाएं।

घाव पर टांके न लगवाएं और न ही पट्टी बांधें।

रेबीज़ को लेकर फैली गलत धारणाएं

डॉ. सुनीता कंबोज ने बताया कि रेबीज़ के इलाज को लेकर कई गलत धारणाएं प्रचलित हैं।

डॉ. सुनीता कंबोज

घरेलू उपचार करने से संक्रमण बढ़ सकता है।

खाने-पीने पर कोई परहेज नहीं होता, व्यक्ति सामान्य पौष्टिक आहार ले सकता है।

गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को भी आवश्यकता पड़ने पर एंटी-रेबीज़ वैक्सीन सुरक्षित रूप से दी जा सकती है।

बच्चों और पालतू जानवरों की सुरक्षा।

बच्चों को आवारा कुत्तों और जानवरों से दूर रहने के लिए प्रेरित करें।।

अंधविश्वासों से बचें।

अपने पालतू जानवरों का हर साल रेबीज़ टीकाकरण जरूर करवाएं।

स्वास्थ्य विभाग की अपील

डिप्टी मास मीडिया अधिकारी Deputy Mass Media Officer मनबीर सिंह और BEE दिवेश कुमार ने आम जनता से अपील की है कि वे पालतू जानवरों के टीकाकरण को सुनिश्चित करें और यदि किसी भी व्यक्ति का संपर्क आवारा या बेसहारा जानवर से हो जाए, तो एंटी-रेबीज़ वैक्सीन लगवाने में कोई लापरवाही न बरतें।

रेबीज़ एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन जागरूकता, सही जानकारी और समय पर टीकाकरण से इससे होने वाली मौतों को पूरी तरह रोका जा सकता है। जानवर के काटने को कभी भी हल्के में न लें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें—क्योंकि समय पर लिया गया एक कदम, जीवन बचा सकता है।



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